इंटरनेट के दौर में शिक्षकों की क्या भूमिका है?

इंटरनेट के दौर में शिक्षकों की क्या भूमिका है? ऑनलाइन क्लासेस से बच्चों

इंटरनेट के दौर में शिक्षकों की क्या भूमिका है?
इंटरनेट के दौर में शिक्षकों की क्या भूमिका है?

Internet ke daur me shikshako ki bhumika (इंटरनेट के दौर में शिक्षकों की भूमिका) एवं इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन क्लासेस से बच्चों पर क्या असर एवं शिक्षा में किस प्रकार से ऑनलाइन इंटरनेट मददगार हैं। आदि बातों को आप इस पोस्ट में जानेंगे, वैसे देखा जाए तो इंटरनेट की दौर में शिक्षकों की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। क्योंकि शिक्षकों से इंटरनेट के माध्यम से बच्चों के लिए online शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। लेकिन इस क्लासेस का बच्चों के ऊपर क्या असर पड़ता है और उनका भविष्य क्या किस स्तर पर आदि इस पोस्ट जानेंगे।


इंटरनेट के दौर में शिक्षकों की भूमिका है (Role of teachers in Internet era) 


इंटरनेट के दौर में शिक्षकों की क्या भूमिका है? शिक्षा का संकट सिर्फ़ बिजली, Internet या स्मार्टफोन न होने से ही नहीं जुड़ा हुआ है। ज्यादातर स्कूली बच्चे उस Online course सामग्री पर निर्भर हो रहे हैं। India में शिक्षा, ख़ास कर Schoolgirl शिक्षा कभी भी दोषमुक्त नहीं रही, इसलिए इसकी ओर उंगली उठा देना कोई बहुत बड़ी बात नहीं लगती। इसके कुछ और आयाम दिखाई देने लगे हैं।

Present दौर में विद्यालय आधारित Education online internet हो गयी है। आधारभूत ढांचे और शिक्षकों की कमी से जूझ रहे विद्यालयों तक में अब इसकी pahuch है। online internet कक्षा को इस समय की सबसे बड़ी ज़रूरत के रूप में पेश kiya जा रहा है। लेकिन इसके साथ ही specialist इसके विभिन्न दोषों पर भी ध्यान दिलाने लगे हैं।

बताया जा रहा है कि इस तरह की Education में बहुत सक्षम इन्टरनेट और शिक्षकों की ज़रूरत पड़ती है। इसलिए यह एक प्रकार की विभाजक रेखा बन रही है। Government से लेकर इन्टरनेट प्रदाता कंपनियों तक के तमाम दावों के बीच बिजली, internet और कम से कम एक Mobile तक हर विद्यार्थी की पहुँच नहीं है। पठन-पाठन का यह वैकल्पिक रूप students के स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डाल रहा है, उनमें चिड़चिड़ापन (Irritability) बढ़ रहा है।


ऑनलाइन कक्षाओं के समर्थक (Supporters of online classes) 


इसके साथ-साथ online internet कक्षाओं के समर्थक उन पुरानी काट के अध्यापकों को भी कठघरे में खड़ा कर रहे हैं जो नया सीखने में हिचकते हैं। इस माध्यम ने एक झटके में उनकी तमाम सेवाओं को किनारे कर दिया है। अब वे भी सीखने वालों में शामिल हैं।

लेकिन वर्तमान हालात ऐसे हैं कि इससे बचने का कोई रास्ता नहीं है और हर किसी को online education में ही भविष्य दिख रहा है। Corona का प्रसार बड़ी तेज़ी से हो रहा है और कोविड-19 अभी अपनी जड़ें जमाये रहने वाली है। अपनी तमाम कमियों के बावजूद पढ़ने-पढ़ाने का online internet ही आने वाले लंबे समय तक मुख्य विकल्प रहने वाला है।


Online teaching में मुख्य बात


अध्यापकों का तो ध्यान जा रहा है लेकिन ज्यादातर विशेषज्ञों से वह बात छूट रही है। Online teaching में मुख्य बात है ऐसी कक्षा के लिए ज़रूरी अध्ययन सामग्री यानी 'कंटेंट' । निजी पूंजी से चलने वाले कुछ चुनिंदा संस्थानों को छोड़ दिया जाये तो ज़्यादातर सरकारी और गैर-सरकारी विद्यालय इस वक़्त ऐसे प्लेटफॉर्म पर Online classes ले रहे हैं।

जहाँ Recording या स्टोरेज की सुविधा नहीं है। कारण बड़ा साफ़ है, इसके लिए अतिरिक्त क्लाउड स्पेस की ज़रूरत पड़ेगी जो मुफ़्त नहीं है। Student और अध्यापक दोनों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो जाती है। लगभग हर विद्यार्थी की मांग होती है कि कक्षा में जो विषय पढ़ाया गया उसकी लिखित या Video content मिल जाये ताकि वे बाद में उसका उपयोग कर सकें।

यह स्वाभाविक भी है क्योंकि, आम तौर पर वे कोई भी Concept एक बार में ही नहीं सीख जाते। सामान्य कक्षाओं में सहपाठियों के बीच शंका-समाधान का, सम्बंधित teacher से बातचीत का विकल्प खुला रहता है लेकिन Online classes में ये अवसर न्यून रहते हैं।


छात्रों की मदद के लिए ऑनलाइन कक्षाओं (Online classes to help students) 


यहाँ छात्रों की मदद के लिए इंटरनेट (Internet) ही आगे आता है जहाँ Online classes के आम होने से काफ़ी पहले से ही ज्यादातर विषयों में मदद के लिए पाठ्य-सामग्री उपलब्ध है। ऐसे में यह बात थोड़ी Contradictory लग सकती है कि यह लेख कंटेंट की समस्या से जुड़ा है। यह सच है कि internet पर किसी भी कक्षा और विषय से सम्बंधित सामग्री के कई विकल्प पहले से ही मौजूद हैं।

भारत की स्कूली शिक्षा में N C E R T को अच्छी ख़ासी प्रामाणिकता हासिल है। राज्यों के बोर्ड पर भी उसकी Bookes व विषय चयन की प्रक्रिया कि छाप रहती है। उसकी हरेक किताब का आमुख इन वाक्यों से शुरू होता है। बच्चों के स्कूली जीवन को बाहर के life से जोड़ा जाना चाहिए.

यह सिद्धान्त Book knowledge की उस विरासत के विपरीत है जिसके प्रभाववश हमारी व्यवस्था आज तक स्कूल और घर के बीच अंतराल बनाए हुए है। इन Sentences को पढ़ने के बाद यदि इन्टरनेट (internet) पर उपलब्ध अध्ययन सामग्रियों की विवेचना करें तो यह समझना कठिन नहीं रह जाता कि वे School education के इन ज़रूरी तरीकों से कितने दूर हैं।


इंटरनेट के दौर में शिक्षकों (Teachers in Internet era) 


इंटरनेट के दौर में शिक्षकों की और विद्यालय ऐसा करने में सक्षम हैं। वे अपने students के लिए ऑनलाइन कक्षा के बाद की सहायक सामग्री (Accessories) का निर्माण स्वयं करते हैं। इसका सबसे बड़ा profit तो यह है कि वे अपने students के अनुरूप सामग्री तैयार करते हैं। India जैसे बहुस्तरीय पहचान वाले देश की School education में यह एक आवश्यक तत्व है।

लेकिन बाकियों के संदर्भ में Video और लिखित सामग्री (Written material) प्रदाताओं को यह समझना-समझाना पड़ेगा कि कोई भी विषय या भाषा सिर्फ़ एक इलाके, धर्म या लिंग के students द्वारा ही नहीं पढ़े जाते हैं।

यह भी कि वे अब सिर्फ़ दूर के कभी-कभार वाले Partner की भूमिका में नहीं है। बल्कि कई छात्रों के लिए शिक्षा कि मुख्यधारा (Mainstream) से जुड़ रहे हैं। इसलिए उन्हें किसी विषय के सवाल-जवाबों वाली कुंजी से आगे जाकर सोचना और बताना होगा। 

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