विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science And Technology) संचार एवं अंतरिक्ष के क्षेत्र में विकास

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science And Technology) , संचार एवं अंतरिक्ष के क्षेत्र में विकास, इस भाग में उम्मीदवारों का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, Vigyan Evam Prodyogiki अंतरिक्ष के क्षेत्र में विकास, दूरसंचार एवं अंतरिक्ष (Doorsanchar Evam Antriksh) के क्षेत्र में विकास तथा कम्प्यूटर सम्बंधी मौलिक विचार के ज्ञान का परीक्षण होगा।

सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (Suchna Evam Sanchar Prodyogiki)

प्रौद्योगिकीय (Technological) स्तर पर, इंटरनेट विभिन्न तकनीकों का समन्वित संयोजन है। विभिन्न हार्डवेयरों तथा सॉफ्टवेयरों से युक्त अनेकानेका कम्प्यूटरीय प्रणालियाँ (Computer Systems) , दूरभाष की विभिन्न तकनीकें, सूचनाओं में संचरण व परिवहन के विभिन्न तौर-तरीके, संचार उपग्रहों की विविध प्रणालियाँ इत्यादि तकनीकों के समन्वित संयोजन से इंटरनेट की प्रौद्योगिकी को साकार करना संभव हुआ है।

अपने उपभोक्ताओं के लिए इंटरनेट बहुआयामी (Internet Multidimensional) साधन प्रणाली है। internet popular दूरस्थ लोगों के बीच समकालिक संवाद, सामूहिक रूपेण काम करना, सूचनाओं में हिस्सेदारी व इनका व्यापक प्रचार-प्रसार और सूचनाओं का महासागर (Ocean Of Information) आदि ऐसे ही कुछ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science And Technology) के आयाम हैं।

Internet, सड़कें, टेलीफोन तथा बिजली की भाँति ही किसी भी समाज के लिए ढाँचागत जरूरत बन चुका है। विकसित देशों के साथसाथ विकासशील देशों में भी इसकी पैठ गहरी बन चुकी है। इंटरनेट की संघटक तकनीकों (Component Technologies Of The Internet) “इंटरनेट क्या है ? जाने हिंदी में” की अनुप्रयोज्यता और लागत विषयक सुधारों ने उक्त गहरी पैठ को सुनिश्चित किया है।

Science And Technology
Science And Technology

सूचनाओं के विश्वव्यापापी जाल (Suchna Ka Vishwa Vyapi)

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science And Technology) के माध्यम से सूचनाओं के विश्वव्यापापी (Worldwide Of Information) जाल के साकार होने से गाँव रूपी विश्व अर्थात् ‘Global Village’ की संकल्पना यथार्थ बनती जा रही है। ग्लोबल विलेज (Global Village) की संकल्पना द्विआयामी तथा इंटरनेट-गम्य है। संकल्पना के एक आयाम के अनुसार जिस प्रकार गाँव जैसे लघु समुदाय में संचार अर्थात् सूचनाओं और भावनाओं की भागीदारी आमने-सामने होती है,

उसी प्रकार इंटरनेट के माध्यम से (Internet Ke Madhyam Se) विश्व स्तर पर स्थान और समय के अंतराल को लगभग शून्य करते हुए प्रत्यक्ष संचार किया जा सकता है। वैश्विक गाँव की संकल्पना का दूसरा आयाम भी इतना ही महत्त्वपूर्ण है,

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कि सूचनाओं के महासागर (अर्थात् विश्व के स्तर पर ज्ञान का भण्डार) को प्रत्येक गाँव के लिए उपलब्धता सुनिश्चित करना। ज्ञान-विज्ञान (Gyan vigyan) के स्तर पर ऐसी जानकार गाँव ही संभवत: महात्मा गांधी के ‘ग्राम-स्वराज’ विषयक स्वप्न के निकटतम हो सकते है।

इंटरनेट का संक्षिप्त इतिहास- (Brief History)

मैसाचुसेस्ट टेक्नालॉजी इंस्टीट्यूट के जे.सी.आर. लिकप्लाइडर (JCR Likeplider) (1962) को इंटरनेट की संकल्पना का वैचारिक जनक माना जा सकता है। उन्होंने कम्प्यूटर की ऐसी विश्वव्यापी अंतर्सम्बंधित शृंखला की कल्पना की थी, जिससे तत्काल जानकारी को प्राप्त किया जा सके।

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इसी संस्थान के लियोनार्ड क्लिनरोक (Leonard Kleinrock) ने पैकेट स्विचिंग प्रौद्योगिकी के रूप में व्यवहार्यता की दिशा में पहली सफलता दिलाई। यह प्रौद्योगिकी ऐसी पेटी की भाँति थी जिसका इस्तेमाल एक ही बार में कई लोग कर सकते थे।

1964 में गार्डन मूर (Garden Moor) ने घोषणा की कि प्रत्येक 18 महीनों में ने कम्प्यूटिंग क्षमता (Computing Capability) दोगुनी होती जाएगी। इसे अब मूर का सिद्धांत कहा जाता है। इसी साल मिनी कम्प्यूटरों का बड़े पैमाने पर उत्पादन आरंभ हुआ।

पहला कम्प्यूटर नेटवर्क (First Computer Network)

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science And Technology) के माध्यम से 1966 में अमेरिका रक्षा विभाग (US Department Of Defense) की एक अनुसंधान संस्था डी.आर.पी.ए. ने अपना पहला कम्प्यूटर नेटवर्क (Pratham Computer Network) ‘आरपानेट’ तैयार किया। computer science and engineering

जो पैकेट स्विचिंग प्रणाली (Packet Switching System) पर आधारित था। 1969 में इसी पर पहले चार कार्यक्रम-दाता कम्प्यूटरों को जोड़ा गया। 1972 में अंतर्राष्टीय कम्प्यूटर संचार (Antrashtriy Computer Sanchar) सम्मेलन में बोव कैहन ने पहली बार नेटवर्क का सार्वजनिक प्रदर्शन किया।

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कैहन तथा अन्य लोगों ने टी.सी.पी. / आई.पी. (Tcp / Ip) नामक द्विस्तरीय प्रणाली पर आधारित ओपन आर्किटेक्चर नेटवर्किंग (Architecture Networking) की दिशा में कार्य आरंभ किया। इंटरनेट प्रोटोकाल (आई.पी.) को नेटवर्किंग हार्डवेयर का प्रयोग कर आँकड़ों को प्रवाहित करना था, जबकि त्रुटियों को दूर करने की भूमिका ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकोल (Transmission Control Protocol) (टी.सी.पी.) द्वारा निभाई जानी थी।

इंटरनेट के इतिहास का दूसरा भाग (Second Part Of The History Of The Internet)

इस तरह स दोहरी प्रणाली (Dual System) ने उपभोक्ता के लिए एक से दूसरे छोर तक विश्वसनीय सम्पर्क सुनिश्चित किया। से आरपानेट ने उपर्युक्त दोहरी प्रणाली को अपना लिया। इसी वर्ष पोल मोके पैट्रिक्स ने डोमेन नेमिंग (Domainname) सर्वित (Dns) का पहला यौरा जारी किया तथा इंटरनेट (Internet) को आम जनता के लिए खोल दिया गया।

इस तरह इंटरनेट पर अब किसी व्यक्ति, निगम अथवा राज्य का स्वामित्व नहीं है। इंटरनेट के इतिहास (History Of The Internet) का दूसरा भाग इसके विविध उपयोगों से सम्बंधित है। 1971 में विभिन्न कम्प्यूटरों के मध्य फाइलों के स्थानांतरण की प्रणाली साकार कर ली गयी। internet का इतिहास कब और कहा शुरुआत हुई

प्रथम ईमेल भेजना (Send First Email)

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science And Technology) के माध्यम से वर्ष 1972 में रेटोमलिनसन (Ratomlinson) ने ई-मेल भेजने (Send Email) “news on email through google account” तथा पढ़ने का पहला कार्यक्रम तैयार किया और जोन पोस्टेल (Joan Postel) ने दूरदराज के कम्प्यूटरों को जोड़ने वाली टेलनेट सेवा का खाका तैयार किया।

वर्ष 1979 में पहले नेट-गेम का (MUD) आविष्कार कर लिया गया था। 1984 में ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों ने संयुक्त अकादमकीय नेटवर्क स्थापित (Network Established) किया तथा 1989 तक इंटरनेट में एक लाख कम्प्यूटर जुड़ गए थे।

1988 में राबर्ट मोरिस ने पहला इंटरनेट वर्ग छोड़कर 6, 000 कंप्यूटरों की कार्यप्रणाली को ठप्प कर दिया था। 1990 में आरपानेट का अस्तित्व समाप्त कर दिया गया, लेकिन विश्व स्तर पर नेटवर्किंग 1973 में ही शुरू हो गयी थी जब लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज तथा नार्वे के रायल राडार इस्टेब्लिशमेंट आरपानेट (Rail Radar Establishment Arpanet) से जुड़े थे।

1990 में टिम बर्नर-ली ने वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web) (Www) का आविष्कार कर इंटरनेट पर सूचना (Internet Par Suchna) प्रस्तुति का नया तरीका ईजाद किया। बाद में सर्वाधिक लोकप्रिय बने इस तरीके का मार्ग ग्राफिकल वेब ब्राउजर (1993 में आविष्कृत) ने प्रशस्त किया। इस ब्राइजर को मोजइक कहा गया और इससे विवरण के साथ-साथ चित्रों का प्रदर्शन भी संभव हो गया।

इंटरनेट की क्रियाविधि- (Internet Ki Kriya Vidhi)

राष्ट्रीय या क्षेत्रीय सूचना आधारभूत संरचना पर इंटरनेट (INTERNET) आधारित होता है। यह संरचना उच्च बैंडविड्थ ट्रंक लाइनों (Bandwidth Rrunk Lines) से बना होता है जहाँ से विभिन्न संपर्क लाइनें कम्प्यूटरों को जोड़ती हैं। इन कम्प्यूटरों को ‘होस्ट’ कहा जाता है तथा ये इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (Internet Service Provider) कम्पनियों से जुड़े होते हैं।

ये कम्प्यूटर अनवरत अपने उपभोक्ताओं की सेवा करते रहते हैं जो पर्सनल कम्प्यूटर (Personal Computer) , मोडेम तथा साधारण टेलीफोन लाइनों द्वारा उनसे जुड़े रहते हैं। बदले में उपभोक्ताओं से तयशुदा राशि वसूली जाती है। इंटरनेट पर (Internet Per) हर कम्प्यूटर का एक विशेष पता होता है जो द्विस्तरीय होता है।

आई.पी. (IP) पता अंकीय होता है जबकि सरलता हेतु डोमेन नमिंग प्रणाली (Domain Naming System) “डोमेन परिभाषा” का इस्तेमाल किया जाता है। इंटरनेट बहुविध सेवाएँ देता है जैसे: ई-मेल, टेलनेट, फाइल स्थानांतरण, चैटिंग वर्ल्डवाइड वेब इत्यादि। ई-मेल: अर्थात् इलेक्ट्रॉनिक मेल सर्वाधिक लोकप्रिय है।

प्रत्येक उपभोक्ता का अपना ई-मेल पता (Email Address) होता है। सर्वर नामक कम्प्यूटर ई-मेल की फाइल का संप्रेषण क्लाइट कम्प्यूटरों को करता है। ई-मेल से पाठ, ध्वनि, चित्र आदि का प्रेषण किया जा सकता है।

भारत में पहली व्यापारिक ईमेल सेवा (First Email Service In India)

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science And Technology) के माध्यम से भारत में पहली व्यापारिक ईमेल सेवा (First Email Service In India) 1994 में आरंभ की गयी थी। टेलनेट: इसके जरिए उपभोक्ता को किसी दूर दराज के कम्प्यूटर से जुड़ने की सुविधा प्राप्त हो जाती है।

इंटरनेट पर बातचीत (Internet Per Batchit) (चैटिंग) -दूरदराज स्थानों पर बैठे व्यक्ति एक ही चैट सर्वर पर लॉग करके की-बोर्ड के जरिए एक-दूसरे से बातचीत कर सकते हैं। कई सवीं पर एक साथ हजारों लोग ऐसी बातचीत में भाग ले सकते हैं।

यूनिवर्सल रिसोर्स लोकेटर (Universal Resource Locator)

वर्ल्ड वाइड वेब (www) : यह मनचाही संख्या वाले अंतर्सम्बंधित डाक्यूमेंटों का समूह होता है प्रत्येक डाक्यूमेंट की विशिष्ट पहचान उसका पता होता है। ऐसे पतों का स्वरूप मानकीकृत है जिसे यू.आर.एल. (URL) (यूनिवर्सल रिसोर्स लोकेटर) (Universal Resource Locator) कहा जाता है।

वेब की लोकप्रियता के कारक हैं: सरलता, हायपरलिंक, मल्टीमीडिया, (Simplicity, Hyperlink, Multimedia) विस्तार की संभावना इत्यादि। वेब कई तरह की सेवाएँ उपलब्ध कराता है, जैसे: सचिंग, इंटरनेट टेलीफोनी, विडियो: ना-कांफ्रेंसिंग इत्यादि।

व्यवसाय को संचालित ई-कामर्स (Business Driven E-Commerce)

ई-कामर्स (E-Commerce) : किसी भी प्रकार के व्यवसाय को संचालित करने के लिए इंटरनेट पर की जानेवाली कार्यवाही को इलेक्ट्रॉनिक कामर्स (Electronic Commerce) कहते हैं। क्रय-विक्रय तथा सूचनाओं का संप्रेषण ऐसी मुख्य कार्यवाहियाँ हैं।

ई-कामर्स (Electronic Commerce) की तीन मुख्य श्रेणियों में बिजनेस टू कंज्यूमर (B2C) सर्वाधिक लोकप्रिय है। बिजनेस टू बिजनेस (B2B) तथा कंज्यूमर टू कंज्यूमर (C2C) अन्य श्रेणियाँ हैं। -सी 2-सी श्रेणी का दायरा अभी सीमित है।

जो एम कामर्स: अर्थात् मोबाइल कामर्स (Mobile Commerce) अपेक्षाकृत नया घटनाक्रम है। इसके उपभोक्ता इंटरनेट पर लेन-देन के लिए सेल्युलर फोन और पर्सनल डिजिटल असिस्टेंट (Cellular Phone And Personal Digital Assistant) जैसे उपकरणों का भी प्रयोग करते हैं।

इंटरनेट और उद्योग (Internet And Industry)

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science And Technology) के माध्यम से इंटरनेट और उद्योग (Internet And Industry) : इंटरनेट की लोकप्रियता ने विशिष्ट उत्पादन एवं अनुरक्षण गतिविधियों से सम्बंधित उद्योगों के साथ-साथ समग्र औद्योगिक परिवेश (Industrial Environment) को फलने-फूलने का अवसर दिया है। कम्प्यूटरों के निर्माण व अनुरक्षण, ऑप्टिकल फाइबर, संचार उपग्रह व सेलफोन मूलक-2 तर कर उपकरणों व सेवाओं आदि ऐसी ही विशिष्ट गतिविधियाँ हैं।

एक्स्ट्रानेट (extranet) : इंट्रानेट को इंटरनेट (Internet To Intranet) से जोड़ा जा सकता है, लेकिन तब गोपनीयता के अनुरक्षण की समस्या उठती है। एक्स्ट्रानेट इंटरनेट (extranet internet) का वैसा आयाम है।

जिसमें विविध इंट्रानेटों को विशिष्ट छलनियों के जैसी प्रौद्योगिकीयों (Technologies) के माध्यम से सुरक्षित कर इंटरनेट से जोड़ा जाता है। एक्ट्रानेट में वहीं सूचनाएँ सार्वजनिक पहुँच में होती हैं। जिन्हें सम्बंधित संगठन आम करना चाहता है।

इंट्रानेट (Intranet) : यह किसी औद्योगिक संगठन या अन्य किसी भी विशिष्ट संगठन का अपना नेटवर्क है जिसे इंटरनेट का विशिष्ट आयाम माना जा सकता है जो सिर्फ विशिष्ट उपभोक्ताओं के लिए खुला हुआ होता है। इसकी मुख्य विशेषता गोपनीयता है।

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